आज का सिंह राशिफल
आज सँभल कर पूरे दिन चन्द्राष्टम
आज सँभलकर चलें, बड़े काम टालें
- चन्द्रमा
- मीन में · आपकी राशि से भाव 8
- चन्द्र बल
- आज चाँद आपके लिए भारी है — यात्रा टालें · चन्द्राष्टम
- शास्त्र का फल
- चन्द्राष्टम
क्यों
- आज चाँद आपके लिए भारी है — यात्रा टालेंचन्द्राष्टम — चन्द्रमा आपकी राशि से 8वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
किस ओर क्या
- मन — सँभल करचन्द्र आपकी राशि से 8वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 28 सितम्बर तकPhaladeepika 26.2
- प्रेम और साथ — रुका हुआशुक्र 3वें भाव में तो शुभ है, पर 1वें भाव में केतु बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 6 नवम्बर तकवेध: केतु भाव 1 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
- काम-काज — शुभबुध आपकी राशि से 2वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में गिना जाता है · 26 सितम्बर तकPhaladeepika 26.2
- धन — सँभल करगुरु आपकी राशि से 12वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- सेहत — सँभल करसूर्य आपकी राशि से 2वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 17 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
शनि ढैया चल रही है संतान, पशु, मित्र और धन की हानि; रोग
शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 8
- यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
- “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
- शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
- चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (8वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
- ढैया भी हिन्दी शब्द है, संस्कृत नहींचौथे को अर्धाष्टम और आठवें को अष्टम कहा जाता है। “कण्टक शनि” का अर्थ भी केवल “केन्द्र में शनि” है — कण्टक केन्द्र का ही पर्याय है (फलदीपिका 1.17) — और चौथा, सातवाँ या आठवाँ, इस पूरी बहस की जड़ वही एक शब्द है।
आज सँभल कर पूरे दिन चन्द्राष्टम
आज सँभलकर चलें, बड़े काम टालें
- चन्द्रमा
- मीन में · आपकी राशि से भाव 8
- चन्द्र बल
- आज चाँद आपके लिए भारी है — यात्रा टालें · चन्द्राष्टम
- शास्त्र का फल
- चन्द्राष्टम
क्यों
- आज चाँद आपके लिए भारी है — यात्रा टालेंचन्द्राष्टम — चन्द्रमा आपकी राशि से 8वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
किस ओर क्या
- मन — सँभल करचन्द्र आपकी राशि से 8वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 28 सितम्बर तकPhaladeepika 26.2
- प्रेम और साथ — रुका हुआशुक्र 3वें भाव में तो शुभ है, पर 1वें भाव में केतु बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 6 नवम्बर तकवेध: केतु भाव 1 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
- काम-काज — सँभल करबुध आपकी राशि से 3वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 2 दिसम्बर तकPhaladeepika 26.2
- धन — सँभल करगुरु आपकी राशि से 12वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- सेहत — सँभल करसूर्य आपकी राशि से 2वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 17 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
शनि ढैया चल रही है संतान, पशु, मित्र और धन की हानि; रोग
शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 8
- यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
- “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
- शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
- चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (8वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
- ढैया भी हिन्दी शब्द है, संस्कृत नहींचौथे को अर्धाष्टम और आठवें को अष्टम कहा जाता है। “कण्टक शनि” का अर्थ भी केवल “केन्द्र में शनि” है — कण्टक केन्द्र का ही पर्याय है (फलदीपिका 1.17) — और चौथा, सातवाँ या आठवाँ, इस पूरी बहस की जड़ वही एक शब्द है।
आज सँभल कर 10:16 am तक चन्द्राष्टम
आज सँभलकर चलें, बड़े काम टालें
- चन्द्रमा
- मीन में · आपकी राशि से भाव 8
- चन्द्र बल
- आज चाँद आपके लिए भारी है — यात्रा टालें · चन्द्राष्टम
- शास्त्र का फल
- चन्द्राष्टम
क्यों
- आज चाँद आपके लिए भारी है — यात्रा टालेंचन्द्राष्टम — चन्द्रमा आपकी राशि से 8वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
फिर सामान्य 10:16 am से रोग
थकान और रुकावट हो सकती है
- चन्द्रमा
- मेष में · आपकी राशि से भाव 9
- चन्द्र बल
- चाँद न साथ है, न ख़िलाफ़ · चन्द्र बल सामान्य
- शास्त्र का फल
- रोग
क्यों
- चाँद न साथ है, न ख़िलाफ़रोग — चन्द्रमा आपकी राशि से 9वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
किस ओर क्या
- मन — सँभल करचन्द्र आपकी राशि से 8वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 28 सितम्बर तकPhaladeepika 26.2
- प्रेम और साथ — रुका हुआशुक्र 3वें भाव में तो शुभ है, पर 1वें भाव में केतु बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 6 नवम्बर तकवेध: केतु भाव 1 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
- काम-काज — सँभल करबुध आपकी राशि से 3वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 2 दिसम्बर तकPhaladeepika 26.2
- धन — सँभल करगुरु आपकी राशि से 12वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- सेहत — सँभल करसूर्य आपकी राशि से 2वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 17 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
शनि ढैया चल रही है संतान, पशु, मित्र और धन की हानि; रोग
शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 8
- यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
- “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
- शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
- चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (8वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
- ढैया भी हिन्दी शब्द है, संस्कृत नहींचौथे को अर्धाष्टम और आठवें को अष्टम कहा जाता है। “कण्टक शनि” का अर्थ भी केवल “केन्द्र में शनि” है — कण्टक केन्द्र का ही पर्याय है (फलदीपिका 1.17) — और चौथा, सातवाँ या आठवाँ, इस पूरी बहस की जड़ वही एक शब्द है।
आज सामान्य पूरे दिन रोग
थकान और रुकावट हो सकती है
- चन्द्रमा
- मेष में · आपकी राशि से भाव 9
- चन्द्र बल
- चाँद न साथ है, न ख़िलाफ़ · चन्द्र बल सामान्य
- शास्त्र का फल
- रोग
क्यों
- चाँद न साथ है, न ख़िलाफ़रोग — चन्द्रमा आपकी राशि से 9वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
किस ओर क्या
- मन — सँभल करचन्द्र आपकी राशि से 9वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 30 सितम्बर तकPhaladeepika 26.2
- प्रेम और साथ — रुका हुआशुक्र 3वें भाव में तो शुभ है, पर 1वें भाव में केतु बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 6 नवम्बर तकवेध: केतु भाव 1 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
- काम-काज — सँभल करबुध आपकी राशि से 3वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 2 दिसम्बर तकPhaladeepika 26.2
- धन — सँभल करगुरु आपकी राशि से 12वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- सेहत — सँभल करसूर्य आपकी राशि से 2वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 17 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
शनि ढैया चल रही है संतान, पशु, मित्र और धन की हानि; रोग
शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 8
- यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
- “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
- शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
- चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (8वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
- ढैया भी हिन्दी शब्द है, संस्कृत नहींचौथे को अर्धाष्टम और आठवें को अष्टम कहा जाता है। “कण्टक शनि” का अर्थ भी केवल “केन्द्र में शनि” है — कण्टक केन्द्र का ही पर्याय है (फलदीपिका 1.17) — और चौथा, सातवाँ या आठवाँ, इस पूरी बहस की जड़ वही एक शब्द है।
आज सामान्य 1:13 pm तक रोग
थकान और रुकावट हो सकती है
- चन्द्रमा
- मेष में · आपकी राशि से भाव 9
- चन्द्र बल
- चाँद न साथ है, न ख़िलाफ़ · चन्द्र बल सामान्य
- शास्त्र का फल
- रोग
क्यों
- चाँद न साथ है, न ख़िलाफ़रोग — चन्द्रमा आपकी राशि से 9वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
फिर शुभ 1:13 pm से कार्य-सिद्धि
रुका हुआ काम पूरा होगा
- चन्द्रमा
- वृषभ में · आपकी राशि से भाव 10
- चन्द्र बल
- चाँद आज आपके साथ है · चन्द्र बल अनुकूल
- शास्त्र का फल
- कार्य-सिद्धि
क्यों
- चाँद आज आपके साथ हैकार्य-सिद्धि — चन्द्रमा आपकी राशि से 10वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
किस ओर क्या
- मन — सँभल करचन्द्र आपकी राशि से 9वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 30 सितम्बर तकPhaladeepika 26.2
- प्रेम और साथ — रुका हुआशुक्र 3वें भाव में तो शुभ है, पर 1वें भाव में केतु बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 6 नवम्बर तकवेध: केतु भाव 1 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
- काम-काज — सँभल करबुध आपकी राशि से 3वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 2 दिसम्बर तकPhaladeepika 26.2
- धन — सँभल करगुरु आपकी राशि से 12वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- सेहत — सँभल करसूर्य आपकी राशि से 2वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 17 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
शनि ढैया चल रही है संतान, पशु, मित्र और धन की हानि; रोग
शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 8
- यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
- “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
- शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
- चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (8वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
- ढैया भी हिन्दी शब्द है, संस्कृत नहींचौथे को अर्धाष्टम और आठवें को अष्टम कहा जाता है। “कण्टक शनि” का अर्थ भी केवल “केन्द्र में शनि” है — कण्टक केन्द्र का ही पर्याय है (फलदीपिका 1.17) — और चौथा, सातवाँ या आठवाँ, इस पूरी बहस की जड़ वही एक शब्द है।
आज शुभ पूरे दिन कार्य-सिद्धि
रुका हुआ काम पूरा होगा
- चन्द्रमा
- वृषभ में · आपकी राशि से भाव 10
- चन्द्र बल
- चाँद आज आपके साथ है · चन्द्र बल अनुकूल
- शास्त्र का फल
- कार्य-सिद्धि
क्यों
- चाँद आज आपके साथ हैकार्य-सिद्धि — चन्द्रमा आपकी राशि से 10वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
किस ओर क्या
- मन — शुभचन्द्र आपकी राशि से 10वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में गिना जाता है · 2 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- प्रेम और साथ — रुका हुआशुक्र 3वें भाव में तो शुभ है, पर 1वें भाव में केतु बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 6 नवम्बर तकवेध: केतु भाव 1 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
- काम-काज — सँभल करबुध आपकी राशि से 3वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 2 दिसम्बर तकPhaladeepika 26.2
- धन — सँभल करगुरु आपकी राशि से 12वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- सेहत — सँभल करसूर्य आपकी राशि से 2वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 17 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
शनि ढैया चल रही है संतान, पशु, मित्र और धन की हानि; रोग
शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 8
- यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
- “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
- शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
- चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (8वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
- ढैया भी हिन्दी शब्द है, संस्कृत नहींचौथे को अर्धाष्टम और आठवें को अष्टम कहा जाता है। “कण्टक शनि” का अर्थ भी केवल “केन्द्र में शनि” है — कण्टक केन्द्र का ही पर्याय है (फलदीपिका 1.17) — और चौथा, सातवाँ या आठवाँ, इस पूरी बहस की जड़ वही एक शब्द है।
आज शुभ 3:40 pm तक कार्य-सिद्धि
रुका हुआ काम पूरा होगा
- चन्द्रमा
- वृषभ में · आपकी राशि से भाव 10
- चन्द्र बल
- चाँद आज आपके साथ है · चन्द्र बल अनुकूल
- शास्त्र का फल
- कार्य-सिद्धि
क्यों
- चाँद आज आपके साथ हैकार्य-सिद्धि — चन्द्रमा आपकी राशि से 10वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
फिर शुभ 3:40 pm से लाभ
फ़ायदे का दिन है
- चन्द्रमा
- मिथुन में · आपकी राशि से भाव 11
- चन्द्र बल
- चाँद आज आपके साथ है · चन्द्र बल अनुकूल
- शास्त्र का फल
- लाभ
क्यों
- चाँद आज आपके साथ हैलाभ — चन्द्रमा आपकी राशि से 11वें भाव में
यह क्या नहीं देखता
- ऊपर का शब्द चन्द्र-बल से है, जिस पर वेध नहीं लगता; नीचे हर कारक ग्रह पर वेध भी लगाया गया है
- यह गोचर है, जन्म कुंडली नहीं — भाव आपकी राशि से गिने गए हैं, लग्न से नहीं
- ग्रहों का बल और दशा इसमें शामिल नहीं
किस ओर क्या
- मन — शुभचन्द्र आपकी राशि से 10वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में गिना जाता है · 2 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- प्रेम और साथ — रुका हुआशुक्र 3वें भाव में तो शुभ है, पर 1वें भाव में केतु बैठा है — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता है · 6 नवम्बर तकवेध: केतु भाव 1 — शास्त्र में यही वेध है, जो शुभ फल रोक देता हैPhaladeepika 26.2, 26.3-8
- काम-काज — सँभल करबुध आपकी राशि से 3वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 2 दिसम्बर तकPhaladeepika 26.2
- धन — सँभल करगुरु आपकी राशि से 12वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 31 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
- सेहत — सँभल करसूर्य आपकी राशि से 2वें भाव में है, जो इसके शुभ भावों में नहीं है · 17 अक्टूबर तकPhaladeepika 26.2
शनि ढैया चल रही है संतान, पशु, मित्र और धन की हानि; रोग
शनि अभी मीन में, आपकी राशि से भाव 8
- यह हर चौथे व्यक्ति पर, हर समय चलती हैशनि तीन राशियों में रहता है और राशियाँ बारह हैं। कोई दुर्लभ बात नहीं है।
- “साढ़ेसाती” किसी शास्त्र का शब्द नहीं हैयह हिन्दी-मराठी है, और किसी शास्त्र में साढ़े सात वर्ष की कोई अवधि नहीं मिलती। फलदीपिका 26.22-23 शनि का फल बारहों भावों के लिए अलग-अलग गिनाती है, और बारहवाँ वहाँ पहले-दूसरे के पास नहीं, सूची के अन्त में है।
- शनि बारह में से नौ भावों में अशुभ हैइसलिए बारहवाँ, पहला और दूसरा कोई विशेष तीन नहीं। शुभ केवल तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ हैं — ऊपर का रंग उसी से आता है, नाम से नहीं।
- चढ़ती–शिखर–उतरती जैसे तीन चरण शास्त्र में नहीं हैंऊपर जो फल लिखा है वह उसी भाव का है जिसमें शनि इस समय है (8वाँ), फलदीपिका 26.22-23 से।
- ढैया भी हिन्दी शब्द है, संस्कृत नहींचौथे को अर्धाष्टम और आठवें को अष्टम कहा जाता है। “कण्टक शनि” का अर्थ भी केवल “केन्द्र में शनि” है — कण्टक केन्द्र का ही पर्याय है (फलदीपिका 1.17) — और चौथा, सातवाँ या आठवाँ, इस पूरी बहस की जड़ वही एक शब्द है।
यह गोचर है: चन्द्रमा की चाल आपकी राशि से गिनी गई (फलदीपिका, अध्याय 26)। जन्म-नक्षत्र से तारा बल भी जुड़ता है, जो ऐप में है।
सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक, समुद्र-तल क्षितिज पर, इसी फ़ोन-ऐप के इंजन से गिना हुआ। कोई अनुमान नहीं। तरीक़ा ›
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